शुक्रवार, 12 मार्च 2010

साजन की धडकन का गीत

साजन की धडकन का गीत



बन के धड़कन, तेरे दिल में, धडका करूँ

रूह बन कर, तेरे तन में, बसती रहूँ ॥



बन के दृष्टि, समाऊँ, तेरे नैन में
तेरी नज़रों से, दुनिया, यूँ देखा करूँ ॥



मैं जो छू लूं, तो सिहरन, तेरी बन रहूँ

तू जो छू ले, तो निस दिन, ही महका करूँ ॥



तू जो बोले, तो निकले, मेरे बोल ही

जब भी बोलूँ, तेरी बातें, बोला करूँ ।।



पास बैठूँ, तेरे तो, सखा भाव से,

तेरी संगी बनूं और सखी हो रहूँ ॥

औढे तू जो, अगर, बन जाउँ औढनी
बिछ जाउँ, तेरे तल, बिछौना बनूँ ॥

तू चले तो, चरण में खडाऊ बनूँ

तेरी सांसें बनूं, संग हमेशा रहूँ ।।