शनिवार, 25 दिसंबर 2010

आपकी याद आती रही .. ..
धड़क रही अनगिन धड़कन, पर हरदिन याद तुम्हारी है
साँसे अनगिन आती जाती पर खुशबू एक तुम्हारी है
आंसू की लडियां बह निकली और हर इक बूँद तुम्हारी है
मेरी यादों की दुनिया में, प्रिय प्रीतम याद तुम्हारी है

ज़ज्बातों का दौर चल पडा हर ज़ज्बात तुम्हारे हैं
अहसानों का भार बड़ा और हर अहसास तुम्हारा है
यूं दुनिया में संगी सब, पर सब संगी कहने को हैं
तरस गई अखियाँ तुम बिन, हर सपना सजन तुम्हारा है

3 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
विलायत क़ानून की पढाई के लिए

Ashok ने कहा…

तुम अच्छा लिखती हो ... पर पुरानी बातें ज्यादा अच्छी लगती हैं ... लगता है शब्द और सोच एक दूसरे के साथ जबरदस्ती बंध गये गए हैं ... तुम्हारी हर बात में एक मासूमियत हुआ करती थी...वोह बांधती थी और अपनी ओर खींचती थी ... तुमने मुंडेरों से उतरती धूप की बातें की थीं ... क्या जाड़ों की पसरी धूप नहीं छूती मन को अब ...

अच्छा लिखो ... वैसा ही जैसी तुम हो ...

harminder kaur bublie ने कहा…

jaro ki dhoop to arsoo se nahi dekhi sadiyaan hui jadoon mein to sard hawaaein barfoon ke dher laga rehte hein par jaade ka naamlete hi aap ki yaad aa jati hai
sookhe patte aap ki gadi ke sheeshei par hi dekhai dete hein
shukriya bahut payar